| कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, कार्मिक मामलों विशेष रूप से भर्ती, प्रशिक्षण, कॅरिअर विकास और स्टाफ कल्याण से संबंधित मुद्दों के बारे में केन्द्र सरकार का एक समन्वयकारी अभिकरण है । यह विभाग सचिव (कार्मिक) के प्रभार में कार्य कर रहा है जिसे सहायक के रूप में दो विशेष सचिव, एक अपर सचिव, चार संयुक्त सचिव और अन्य सहयोगी अधिकारी और कर्मचारी मिले हुए हैं । कार्यात्मक रूप में, यह विभाग वर्तमान समय में 10 प्रभागों में विभाजित है जिसमें से प्रत्येक प्रभाग का प्रमुख संयुक्त सचिव अथवा उससे ऊपर के स्तर के अधिकारी हैं । |
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| विभाग के प्रभाग |
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| क्रम सं. प्रभाग का नाम |
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| 1. स्थापना अधिकारी (ईओ) |
| 2. स्थापना |
| 3. प्रशासनिक अधिकरण |
| 4. केन्द्रीय सचिवालय (सीएस) |
| 5. संवर्ग पुनरीक्षा (सीआर) |
| 6. पुनर्प्रशिक्षण और पुनर्रोजगार (आरआर) |
| 7. राज्य पुनर्गठन (एसआर) |
| 8. कल्याण |
| 9. सतर्कता |
| 10. प्रशिक्षण |
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| 1. स्थापना कार्यालय प्रभाग |
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| स्थापना अधिकारी(मंत्रिमण्डल की नियुक्ति समिति) |
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| सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रबन्धन बोर्ड (अध्यक्ष, प्रबन्ध निदेशक, निदेशक, जिसमें अंशकालिक निदेशक शामिल है) और सांविधिक आयोग, अधिकरण, रेलवे/बैंक वित्तीय संस्थाएं – सरकार के नियंत्राधीन स्वायत्त संस्था आदि (चाहे अवैतनिक अथवा वैतनिक) पर सभी नियुक्तियां और इससे संबंधित नीतिगत मामले । |
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| ई ओ (वरिष्ठ प्रबंधन-I) |
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| · सिविल सेवा बोर्ड की बैठकों का आयोजन करना। |
| · केन्द्र में संयुक्त सचिव के समकक्ष स्तर के पदों के लिए भा० प्र० से०, भा०प्र०से० और केंद्रीय सेवासमूह 'क' अधिकारियों को सूचीबद्ध करना। |
| · सी०पी०ओ० में महानिरीक्षक/अपर डी.जी. के स्तर के पदों के लिए भा० प्र० से०, अधिकारियों को सूचीबद्ध करना। |
| · संयुक्त सचिव के स्तर पर प्रस्तावित अधिकारी के नामों को सुरक्षित रखना। |
| · भारत सरकार में संयुक्त सचिव/समकक्ष के स्तर पर अधिकारियों का स्थापन करना। |
| · मंत्रीमंडल सचिव के कार्यालय से प्राप्त अपर सचिव तथा सचिव एंव उनके समकक्ष स्तर पर नियुक्तियों के संबंध में आदेश जारी करना। |
| · विभिन्न सी.पी.ओ. में महानिरीक्षक और इससे ऊपर के स्तर पर भा० प्र० से०, अधिकारियों की नियुक्ति करना। |
| · केन्द्र में सेवा करने वाले अधिकारियों की सेवा अवधि के विनियमन पर नीति। |
| · संयुक्त सचिव और समकक्ष के स्तर पर केन्द्र में सेवा करने वाले अधिकारियों की सेवा अवधि का विस्तार करना। |
| · केन्द्रीय स्टॉफिग स्कीम के प्रावधानों के विभिन्न पहलुओं का विनियमन करना। |
| · मंत्रीमंडल की नियुक्ति समिति का अनुमोदन की अपेक्षा रखने वाली अखिल भारतीय सेवाओं की अन्तर/संवर्ग प्रनिनियुक्ति/स्थानांतरण। |
| · मंत्रीमंडल की नियुक्ति समिति की अपेक्षा रखने वाले सा०क्षे०उप० में मुख्य सतर्कता अधिकारियों की नियुक्ति। |
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| ई.ओ. (वरिष्ठ प्रबंधन-II) |
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| रेल मंत्रालय और ऐसे पद जिनमें भा० प्र० से०, अधिकारियों की नियुक्ति सम्मिलित होती है, को छोड़कर सभी मंत्रालयों से निदेशक और इससे ऊपर के स्तर पर केन्द्रीय स्टाफिंग स्क्रीम के बाहर के पदों के संबंध में निम्नलिखित प्रस्तावों को ए.सी.सी. के अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया गया है। |
| · सीधी भर्त्ती द्वारा नियुक्ति। |
| · पदोन्नति। |
| · प्रतिनियुक्ति/स्थानांतरण। |
| · लचीली पूरक स्कीम के अंतर्गत पदोंन्नतियों। |
| · एन० एफ० एस० जी० के लिए पदोन्नतियां। |
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| ई.ओ. (मध्य प्रबंधन-I) |
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| · केन्द्रीय स्टाफिंग स्कीम के अंतर्गत अवर सचिव/उप सचिव तथा निदेशक स्तर पर भा० प्र० से०,/ के० स० से०/केन्द्रीय समूह 'क' सेवाओं से संबंधित अधिकारियों की नियुक्तियां/तैनातियां। |
| · के० स० से० चयन ग्रेड चयन सूची की कर्मचारी संख्या का निर्धारण करने के अतिरिक्त के० स० से० निदेशक की उपयुक्तता सूची तैयार करना। |
| · मंत्रालयों में मंत्रियों के निजी सचिवों की नियुक्ति तथा केंद्रीय स्टाफिंग स्कीम से संबंधित विभिन्न नीतिगत मामले जैसे कार्यकाल कूलिंग ऑफ अवधि तथा कार्यकाल का विस्तार/समय पूर्व प्रत्यावर्तन आदि। |
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| ई.ओ. (मध्य प्रबंधन-II) |
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| · निदेशको के स्तर पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए ऑफर स्त्राव सूची तैयार करना। |
| · भारत सरकार के गैर-सचिवालय पदों और संवर्ग बाह्य पदों के लिए निदेशक के स्तर तक अधिकारियों की नियुक्ति करना। |
| · सा० क्षे० उपक्रमों में निदेशक स्तर तक केंद्रीय सतर्कता अधिकारियों की नियुक्ति करना। |
| · निदेशक के स्तर तक भा० प्र० से० अधिकारियों की समयपूर्ण सेवा निवृत्ति संबंधी मामले। |
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| ई. ओ. (पी.आर.) |
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| · भा० प्र० से०/ के० स० से० (ग्रेड 1 एवं अधिक) अधिकारियों की गोपनीय रिपोर्टों का रख-रखाव करना और उचितअभिरक्षा करना तथा केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर आए भा० प्र० से० के अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्टों का संग्रह करना तथा उन्हें उनके संवर्ग प्राधिकारियों को भेजना। |
| · भा० प्र० से०/ के० स० से० ग्रेड 1 एवं ऊपर के स्तर के अधिकारियों की अचल सम्पत्ति विवरणियों का रख-रखाव करना। |
| · संयुक्त सचिव रैंक के या समकक्ष स्तर के अधिकारियों की प्रतिकूल टिप्पणियों के विरूद्ध प्रतिवेदनों को मंत्रीमंडल की नियुक्ति समिति के विचारार्थ एवं निर्णय के लिए प्रस्तुत करना। |
| · भा० प्र० से०/ के० स० से० अधिकारियों (ग्रेड 1 एवं ऊपर) के अभ्यावेदनों को सक्षम प्राधिकारी के विचारार्थ एवं निर्णय के लिए प्रस्तुत करना। |
| · प्रशासनिक प्राधिकारियों द्वारा भा० प्र० से०/ के० स० से० अधिकारियों की वा० गो० रि० में बताई गई/हटाई गई प्रतिकूल टिप्पणियों का अनुसमर्थन करना/हटाना/सत्यापन करना। |
| · सराहना पत्रों/प्रशंसा पत्रों; सीखी गई नई भाषाओं के संबंध में प्रमाण-पत्र; अर्जित शौक्षिक अर्हताओं; तथा प्रकाशित, पुस्तक, लेखों और अन्य प्रकाशन या ऐसे प्रकाशन जिसके लिए ग्रेड 1 एवं ऊपर के भा० प्र० से०/के० स० से० अधिकारियों के गो० रि० डोजियरों में जिसके लिए वह उत्तरदायी है के रिकॉर्ड की प्रति रखना। |
| · शास्ति (चेतावनी), फटकार या अप्रसन्नता संबंधी आदेशों की प्रति रखना तथा ग्रेड 1 एवं ऊपर के भा० प्र० से०/ के० स० से० अधिकारियों के गो० रि० डोजियरों में लगाए गए आरोपों या अभिकथनों की जांच संबंधी अंतिम रिकोर्डों का रिकार्ड रखना। |
| · केंद्र में संयुक्त सचिव/उपसचिव तथा निदेशक के पद के लिए सूचीबद्धता हेतु भा० प्र० से०/ के० स० से० अधिकारियों के गो० रि० के डोजियर भेजना। |
| · मंत्रीमंडल सचिव को अपर सचिव/सचिव स्तर पर सूचीबद्धता हेतु भा० प्र० से०/ के० स० से० अधिकारियों के गो० रि० डोजियरों की आपूर्ति करना। |
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| ई.ओ. (विदेश नियुक्ति अनुभाग) |
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| · द्वि-पक्षीय/आई.टी.ई.सी. समानुदेशन के अंतर्गत एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों कें विदेश नियुक्ति के लिए विभिन्न क्षेत्रों जैसे कि चिकित्सा, इंजीनियरिंग, शिक्षण, लेखा, कृषि, अर्थशास्त्र आदि में विशेषज्ञों का पंजीकरण करना। |
| · उक्त क्षेत्रों में से किसी में विदंश मंत्रालय से प्राप्त मांगों पर, एफ.ए.एस.सी. द्वारा विशेषज्ञों का चयन करना तथा द्विपक्षीय एवं आई.टी.ई.सी. समानुदेशनों के अंतर्गत उनकी संस्तुति करना। |
| · सीधे प्रस्ताव किए जाने के मामलों में उक्त क्षेत्रों में से किसी एक में विशेषज्ञों को अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी करना। |
| · केंद्रीय स्थापना बोर्ड को 5 वर्ष से अधिक समय तक ठहरने संबंधी मामलों को प्रस्तुत करना। |
| · केंद्रीय स्थापना बोर्ड की बैठकें आयोजित करना। |
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| ई. ओ. (विदेश नियुक्ति-संयुक्त राष्ट्र) |
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| · भारत सरकार के विदेशी तथा वंश कैप्टिव पदों में विदेशी नियुक्ति पर अधिकारियों का नामांकन और चयन करना। |
| · ऐसे अधिकारी, जिन्होनें अपने विगत कार्य और अनुभव के आधार पर सीधे प्रस्ताव प्राप्त कर लिए हैं, या खुले विज्ञापन के जवाब में जिनके आवेदन करने और इसके पश्चात् चयन करवाने वाले अधिकारियों के संबंध में संवर्ग स्वीकृति संबंधी मामलों को प्रस्तुत करना। |
| · संयुक्त राष्ट्र और इसकी संबंद्ध एजेंसियों के अंतर्गत लोक प्रशासन के क्षेत्र में अधिकारियों की विदेशी नियुक्ति के लिए अधिकारियों का पैनल तैयार करना। |
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| ई.ओ. (कैरियर प्रबंधन) |
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| स्थापना कार्यालय के कार्यालय के कैरियर प्रबंधन (सी.एम.) प्रभाग केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आने वाले सभी भा० प्र० से० अधिकारियों और समूह 'क' सेवाओं के अधिकारियों का डाटाबेस का रख रखाव करने के लिए जिम्मेदार है। यह अवर सचिव और ऊपर के स्तर के के० स० से० अधिकारियों के भी डाटाबेस का रख रखाव करता है। मूलत: यह ई.ओ. प्रभाग में डाटाबैंक है जो ई.ओ. प्रभाग के साथ-साथ ई.ओ. प्रभाग के बाहर के अन्य अनुभागों, और केंद्रीय सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों की आवश्यकताओ को पूरा करता है। इन रिकॉर्डों का रख रखाव कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों एवं राज्य सरकारों में विभिन्न अनुभागों द्वारा जारी किए गए 'आदेशों' के आधार पर किया जाता है। इस प्रकार, सी० एम० प्रभाग अन्य अनुभागों की सूचना आर.टी.आई., संसद प्रश्न आदि संबंधी महत्वपूर्ण मामलों को निपटाने के लिए अपेक्षित तत्काल उपलब्ध डिजिटलकृत सूचना मुहैया कराने में, और विदेशी नियुक्तियों और प्रशिक्षणों आदि संबंधित मामलों को भी प्रस्तुत करने में सहायता करता है। |
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| 2.स्थापना प्रभाग |
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| स्थापना प्रभाग केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के लिए कार्मिक और मानव संसाधन प्रबंधन नीतियों के लिए कार्मिक और प्रशिक्षण विभागका नोडल प्रभाग है। इसके प्रमुख कार्यों में शामिल है: |
| (क) नीति संरचना और विकास; इसे परिवर्तनशील सामाजिक-आर्थिक वास्ताविकताओं के प्रति अधिक अनुक्रियाशील बनाना तथा वैश्विक पर्यावरण विकासित करना। |
| (ख) नीति प्रबंधन। |
| (ग) नीति एवं सलाहकार संबंधी सेवाएं। |
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| अनुभाग वार व्यापक कार्य आबंटन:- |
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| स्थापना (क)- कार्य आबंटन में शामिल हैं- |
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| डेस्क-1 |
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| सेवानिवृत्ति पश्चात् वाणिज्यिक रोजगार प्रदान करने के लिए नीति तथा सं० सचिव एवं इससे ऊपर के स्तर के सेवानिवृत्ति अधिकारियों को अनुमति प्रदान करने के लिए प्रस्तावों कों प्रस्तुत करना गोपनीय रिपोर्टों संबंधी नीति – आकस्मिक अवकाश तथा विशेष आकस्मिक अवकाश याचिका अनुदेश-पंजीकरण । |
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| डेस्क-2 |
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| के०लि०से० (सी.सी.ए) नियमावली, 1965-विवेचन एवं अनुप्रयोग-के०लि०से० (आचरण) नियमावली, 1964-पदोन्नति के लिए मुहरबन्द कवर पद्धति – पदों के वर्गीकरण पर सामान्य नीति और राजपत्रित हैसियत प्रदान करना । |
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| डेस्क- 3 |
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| सेवानिवृत्ति की आयु-स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति-समय पूर्व सेवानिवृत्ति-सेवा में विस्तार-एल.टी.सी.-स्थांनातरण नीति |
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| स्था०(ख) |
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| - संघ लोक सेवा आयोग से संबंधित सभी प्रशासनिक कार्य। |
| - कर्मचारी चयन आयोग से संबंधित सभी प्रशासनिक कार्य। |
| - चरित्र एवं पूर्ववृत के सत्यापन पर नीति। |
| - लोक उद्यम चयन बोर्ड से संबंधित नीतिगत मामले। |
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| स्था०(ग) |
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| - सरकारी कर्मचारियों की परिवीक्षा। |
| - आवेदन को अग्रसरित करने पर नीति। |
| - तकनीकी त्यागतत्र। |
| - समूह 'घ' पद के बारे में सामान्य प्रश्न। |
| - अनियमित कर्मचारियों को नियमित करना। |
| - सी०सी०एस० (अस्थाई सेवा) नियमावली, 1965 |
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| स्था०(घ) |
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| - पदोन्नति एवं वरिष्ठता से संबंधित सामान्य प्रश्न। |
| - आयु में छूट के बारे में सामान्य नीति। |
| - अनुकम्पा आधारित नियुक्ति। |
| - तदर्थ नियुक्ति। |
| - ए०सी०पी० योजना। |
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| स्था०(आर०आर०) |
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| - भर्ती नियम के बनाने से संबंधित नीति। |
| - भर्ती नियमों में संशोधन। |
| - भर्ती नियमों में शिथिलीकरण। |
| - जॉच-पड़ताल-व-चयन समिति प्रणाली। |
| - वैज्ञानिकों के लिए लचीली पूरक योजना। |
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| स्था० (वेतन) |
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| - वेतन निर्धारण, वेतन बढा़ना, वेतन मामलों पर एफ० आर० की व्याख्या, विशेष भत्ते, प्रतिपूरक भत्ते,उच्चतर योगयता प्राप्त करने के लिए और खेलों के विषय में दक्षता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहन। |
| - 5वें वर्ष के बाद प्रतिनियुक्ति की अवधि का विस्तार, विनियामक प्राधिकरणों की निबंधन एवं शर्ते। |
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| स्था० (छुट्टी) |
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| - सामान्य मुद्दे एवं छुट्टी के नियमों की व्याख्या जिसमें विशेष प्रकार की छुट्टी शामिल है। |
| - सेवा प्राप्तिकाएं। |
| - उद्यम कर्मियों से संबंधित छुट्टी के मामले। |
| - संविदा नियुक्ति प्राप्तकर्ताओं पर नियुक्ति की निबंधन एवं शर्तों की अंतिम रूप देना। |
| - कश्मीर घाटी में कार्य करने वाले सी०जी०ई० के लिए विशेष छूट/सुविधाओं का विस्तार। |
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| स्था० (भत्ते) |
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| - परामर्शदाता के विनियोजन/परामर्श शुल्क की योजना। |
| - कार्यभार ग्रहण करने का समय/अनिवार्य इंतजार। |
| - मानदेय/समयोपरि भत्ता/रात्रि ड्यूटी भत्ता। |
| - संसद सहायक को विशेष भत्ता। |
| - टयूशन फीस/पुत्र/पुत्री शिक्षा भता। |
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| स्था (जे०सी०ए०) |
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| - केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए छुट्टी। |
| - संगठन को मान्यता। |
| - समरूप नीति। |
| - संयुक्त परामर्शदायी प्रणाली (मशीनरी)। |
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| स्था (पी०आई०सी०) |
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| - सिविलियन पदों की सीधी भर्त्ती को इष्टतम बनाने पर नीति के लिए नोडल अनुभाग |
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| 3. प्राशासनिक अधिकरण |
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| नियमों और विनियमों की विस्तृत प्रणाली होने के बावजूद जिसमें वैयक्तिक प्रबंध शासित होता है, सरकारी कर्मचारी, सरकारी निर्णयों द्वारा खिन्न होते है। न्यायालय इन मामलों पर निर्णय लेने के लिए कई वर्ष लगा देते थे और वाद खर्चीला था। सरकारी निर्णयों से खिन्न कर्मचारियों को तेज और सस्ता न्याय दिलवाने के क्रम में, स्थापना 1985, में की गई, जो कि सेवा मामलों से जुड़े सभी मामलो को देखती है जोकि पूर्व में न्यायलयों द्वारा देखे जाते थे, जिसमें उच्च न्यायालय भी शामिल है। कैट की 17 नियमित खंडपीठें देश के विभिन्न भागों में कार्य कर रही हैं, जिसमें दिल्ली की मुख्य खंड पीठ शामिल है। |
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| 4. केन्द्रीय सचिवालय प्रभाग (सी०एस० प्रभाग) |
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| कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग का केन्द्रीय सचिवालय प्रभाग तीनों केन्द्रीय सचिवालय सेवाओं के बारे में संवर्ग नियंत्रक प्राधिकारी है, जो कि केन्द्रीय सरकार सचिवालय में सरकारी प्रणाली को समर्थन और निरंतरता प्रदान करता है ये निम्न प्रकार से है:- |
| 1. केंद्रीय सचिवालय सेवा (सी०एस०एस०) |
| 2. केंद्रीय सचिवालय आशुलिपिक सेवा (सी०एस०एस०एस०) |
| 3. केंद्रीय सचिवालय लिपिकीय सेवा (सी०एस०सी०एस०) |
| उपर्युक्त तीनों सेवाओं से संबंधित मामले सी०एस० - । शाखा और सी०एस० - ।। शाखा द्वारा देखे जाते हैं और सी०एस० - ।। शाखा द्वारा देखे जाते हैं और इन तीनों सचिवालय सेवाओं के संगठनों और संघों से संबंधित सभी मामले सी०एस०- ।V अनुभाग द्वारा देखे जाते हैं तीनों संवगों की कर्मचारी संख्या:- |
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| सेवा |
ग्रेड |
कर्मचारी संख्या |
कुल |
|   |
| केंद्रीय सचिवालय सेवा |
चयन ग्रेड (उप सचिव) |
288(स्वयं स्थान शामिल है) |
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| |
ग्रेड ।(अवर सचिव) |
766 |
8313 |
| |
अनुभाग अधिकारी |
2353 |
|
| |
सहायक |
4906 |
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| केंद्रीय सचिवालय आशुलिपिक सेवा |
वरिष्ठ प्रमुख निजी सचिव |
58 |
7117 |
| |
प्रमुख निजी सचिव |
107 |
|
| |
निजी सचिव |
1390 |
|
| |
आशुलिपिक ग्रेड 'ग' (पी०ए०) |
2776 |
|
| |
आशुलिपिक ग्रेड 'घ' |
2786 |
|
| केंद्रीय सचिवालय लिपिकीय सेवा |
उच्च श्रेणीलिपिक (यू०डी०सी०) |
5535 |
11115 |
| |
अवर श्रेणी लिपिक (एल०डी०सी०) |
5580 |
|
| |
| कुल |
|
|
26545 |
|
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| 5. संवर्ग पुनरीक्षा प्रभाग (सीआर प्रभाग) |
|   |
| केन्द्रीय सरकार की 58 समूह ’क’ सेवाओं के संवर्ग पुनरीक्षा मामलों को देखता है । |
|   |
| 6. पुन: प्रशिक्षण और पुन: तैनाती प्रभाग (आर और आर प्रभाग) |
|   |
| भारत सरकार के तत्कालीन अधिशेष प्रकोष्ठ से संबंधित मामलों का निर्वहन करता है और भारत में कहीं भी दत्त अतिरेक सभी केन्द्रीय सरकार कार्मिकों के पुन: प्रशिक्षण और पुन: तैनाती के लिए इस समय उत्तरदायी है । |
|   |
| 7. राज्य पुनर्गठन प्रभाग (एस आर प्रभाग) |
|   |
| राज्य सरकार के कार्मिकों के आबंटन की नीति का निर्वहन करता है जब किसी राज्य का पुनर्गठन होता है और नए सृजित राज्यों के मध्य कार्मिकों का पुन: आबंटन किया जाना होता है । |
|   |
| 8. कल्याण प्रभाग |
|   |
| केन्द्र सरकार देश में बृहत्त एकल नियोक्ता होने के नाते, समग्र देश में फैले अनेक कर्मचारियों के कल्याण की देखभाल के मुख्य उत्तरदायित्व का वहन करता है । यह मंत्रालय यह महसूस करते हुए कि कर्मचारियों का कल्याण वैयक्तिक प्रबंधन के मुख्य कार्यों में से एक है, स्टाफ कल्याण कार्यक्रमों के एक बृहत्त नेटवर्क की व्यवस्था करता है और सहायता करता है जिसके द्वारा यह रेखांकित होता है कि तत्पश्चात् महत्वपूर्ण तथ्य की कर्मचारियों और उनके परिवारों की कार्य और रहन-परिस्थितियों में सुधार, उनके बीच उच्च मनोबल और दक्षता को अभिप्रेत है । कल्याण प्रभाग के अंतर्गत तीन अनुभाग हैं |
| - कल्याण अनुभाग |
| - कैंटीन अनुभाग |
| - खेलकूद अनुभाग |
|   |
| 9. सतर्कता |
|   |
| वैयक्तिक प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण अवयव नौकरशाही के व्यावसायिक नीति-शास्त्र और मानकों के रखरखाव करने का है । कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग उस क्षेत्र में विभिन्न मंत्रालयों/विभागों की गतिविधियों का समन्वय और भ्रष्टाचार का उन्मूलन तथा लोक सेवाओं की सत्यनिष्ठा की देखरेख हेतु सरकारी नीति निर्धारित करता है । तथापि, भारत सरकार के सभी मंत्रालयों/विभागों और कार्यालयों का उनके कार्य के संचालन क्षेत्र में भ्रष्टाचार का उन्मूलन तथा रोकथाम उपाय करने से उनके स्टाफ की सत्यनिष्ठा और अनुशासन की देखरेख हेतु सीधा उत्तरदायित्व है । |
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| 10. प्रशिक्षण |
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| प्रशिक्षण प्रभाग भारतीय प्रशासनिक सेवा और अन्य अखिल भारतीय सेवाओं तथा केन्द्रीय सेवाओं में आगन्तुकों के प्रवेश प्रशिक्षण को प्रशासित करता है । विभाग केन्द्र और राज्य सरकार की विभिन्न श्रेणियों हेतु विभिन्न विषयों पर अनेक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रायोजित भी करता है । प्रशिक्षण प्रभाग सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों के प्रशिक्षण उपस्कर के उन्नयन हेतु सहायता प्रदान करता है । प्रशिक्षण प्रभाग राष्ट्रीय प्रशिक्षण नीति के कार्यान्वयन का समन्वय भी करता है जो अप्रैल 1996 में अंगीकृत की गई थी । |